खूबसूरती… आज़ रास्तें पर मुझसे यू टक़रा गई ‘खूबसूरती’ ।
आज़ रास्तें पर मुझसे यू टक़रा गई ‘खूबसूरती’ कुछ़ पतलीं सी,कुछ लचीली सीं,सरक़ते यौवन मे मस्तानीं सी, ‘वो मेरी जान’ ! ब़लखाती थी,ईतराती थी,मदमस्त हवा मे चलीं आती थीं, ‘वो मेरी जान’ ! कुछ रोक़कर उसें,यह प्रश्न पूछ ब़ैठा मैंब़ता बांवरी तेरा नाम़ क्या?वो इतराकर बोलीचल हट दीवाने तेरा क़ाम.
